वैश्विक तापन
वर्तमान की वैश्विक तापन उन प्रमुख समस्याओं में से एक है, जिन्हें लेकर आज विश्व अत्यधिक चिंतित है। वैश्विक तापन का विषय पृथ्वी के तापमान से सीधे जुड़ा हुआ है। पृथ्वी के तापमान का संबंध जीवन की सुरक्षा से है; जीव-जन्तुओं से ही नहीं, मानव के अस्तित्व से भी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की नवीनतम उपलब्धियों ने जहाँ एक ओर मानवीय सुख-सुविधाओं एवं समृद्धि के द्वार खोले हैं, वहीं उसके समानांतर प्रकृति से आवश्यकता से अधिक छेड़छाड़ के परिणामस्वरूप वातावरण में ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन से वैश्विक तापन की समस्या उत्पन्न हुई है। आज वैश्विक तापन समकालिक चर्चाओं का एक मुख्य विषय बन गया है वैश्विक तापन से उत्पन्न जलवायु परिवर्तन के संभावित खतरों ने जैव-मण्डल एवं जैव-संपदा से लेकर सम्पूर्ण विश्व के समक्ष एक संकट उपस्थित कर दिया है। प्रकृति में होने वाली विभिन्न क्रियाओं में मानव हस्तक्षेप के कारण विगत कुछ दशकों से पृथ्वी के वायुमण्डल में अनेक अनपेक्षित परिवर्तन देखे गये हैं। शहरीकरण व औद्योगिक विकास के चलते निरंतर वृक्षों का कटना व वायुमण्डल में विभिन्न प्रकार की हानिकारक गैसों की सान्द्रता का लगातार बढ़ना पृथ्वी के वायुमण्डल को निरन्तर प्रदूषित कर रहे हैं। इण्टरगवर्नरमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज (आई0पी0सी0सी0) ने अपनी चौथी रिपोर्ट में यह स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि मानवीय हस्तक्षेप को न रोका गया तो पृथ्वी पर जन-जीवन सामान्य रूप से चलना कठिन हो जायेगा। पृथ्वी का बढ़ता तापमान मानव हस्तक्षेप के कारण वायुमण्डल में होने वाले परिवर्तनों के प्रमुख उदाहरण हैं। पिछली आधी सदी के दौरान खासतौर पर कोयला और पेट्रोलियम जैसे जीवाश्म ईंधनों को जलाने से वातावरण में कार्बन डाई ऑक्साइड और दूसरी ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा खतरनाक हदों तक जा पहुँची है। एक अनुमान के अनुसार हमारे वातावरण में उद्योग-पूर्व युग की तुलना में 30 प्रतिशत से ज्यादा कार्बन
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